पंचांग 21 अगस्त 2035

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अगस्त 2035 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय20:37
चंद्रास्त08:03
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
संवत्सर:
राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कुंभ 12:27 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 07:52 तक, फिर कृष्ण तृतीया 07:53 (22 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 18:38 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 19:08 (22 अग॰) तक
योग
सुकर्मा 11:46 तक, फिर धृति 10:42 (22 अग॰) तक
करण
गर 07:52 तक, फिर वणिज 19:56 तक, फिर विष्टि 07:53 (22 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
  • राहु काल15:47 – 17:22
  • यमगंड09:27 – 11:02
  • गुलिक काल12:37 – 14:12

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:02
  • लाभ(शुभ)11:02 – 12:37
  • अमृत(शुभ)12:37 – 14:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:47
  • शुभ(शुभ)15:47 – 17:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:22 – 18:57

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:57 – 20:22
  • लाभ(शुभ)20:22 – 21:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:47 – 23:12
  • शुभ(शुभ)23:12 – 00:37 (22 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (22 अग॰) – 06:17 (22 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें