पंचांग 23 मार्च 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 मार्च 2037 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:36
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय10:57
चंद्रास्त00:17 (24 मार्च)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृषभ 06:02 (24 मार्च) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 12:55 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 12:33 (24 मार्च) तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:53 तक, फिर मृगशीर्ष 18:03 (24 मार्च) तक
योग
प्रीति 08:28 तक, फिर आयुष्मान 07:09 (24 मार्च) तक
करण
तैतिल 12:55 तक, फिर गर 00:48 (24 मार्च) तक, फिर वणिज 12:33 (24 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05
  • राहु काल08:07 – 09:38
  • यमगंड11:09 – 12:41
  • गुलिक काल14:12 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:36 – 08:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:07 – 09:38
  • शुभ(शुभ)09:38 – 11:09
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:09 – 12:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
  • चर(सामान्य)14:12 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:14
  • अमृत(शुभ)17:14 – 18:46

रात

  • चर(सामान्य)18:46 – 20:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
  • लाभ(शुभ)23:12 – 00:40 (24 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:40 (24 मार्च) – 02:09 (24 मार्च)
  • शुभ(शुभ)02:09 (24 मार्च) – 03:38 (24 मार्च)
  • अमृत(शुभ)03:38 (24 मार्च) – 05:06 (24 मार्च)
  • चर(सामान्य)05:06 (24 मार्च) – 06:35 (24 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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