पंचांग 16 अप्रैल 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 अप्रैल 2037 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय06:48
चंद्रास्त19:32
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 22:48 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 23:34 (17 अप्रैल) तक
नक्षत्र
अश्विनी 20:13 तक, फिर भरणी 21:38 (17 अप्रैल) तक
योग
विष्कम्भ 15:38 तक, फिर प्रीति 15:17 (17 अप्रैल) तक
करण
किंस्तुघ्न 10:16 तक, फिर बव 22:48 तक, फिर बालव 11:14 (17 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल14:08 – 15:43
  • यमगंड06:17 – 07:51
  • गुलिक काल09:25 – 11:00

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:17 – 07:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:00
  • चर(सामान्य)11:00 – 12:34
  • लाभ(शुभ)12:34 – 14:08
  • अमृत(शुभ)14:08 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:17
  • शुभ(शुभ)17:17 – 18:51

रात

  • अमृत(शुभ)18:51 – 20:17
  • चर(सामान्य)20:17 – 21:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:34 (17 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)00:34 (17 अप्रैल) – 01:59 (17 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:59 (17 अप्रैल) – 03:25 (17 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)03:25 (17 अप्रैल) – 04:50 (17 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)04:50 (17 अप्रैल) – 06:16 (17 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें