पंचांग 10 सितंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 सितंबर 2037 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:41
चंद्रोदय06:44
चंद्रास्त19:26
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- सिंह 10:51 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 20:02 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 16:14 (11 सित॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 02:34 (11 सित॰) तक, फिर हस्त 23:39 (11 सित॰) तक
- योग
- साध्य 10:38 तक, फिर शुभ 06:20 (11 सित॰) तक, फिर शुक्ल 02:11 (12 सित॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 09:59 तक, फिर बव 20:02 तक, फिर बालव 06:07 (11 सित॰) तक, फिर कौलव 16:14 (11 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:56
- राहु काल14:03 – 15:36
- यमगंड06:21 – 07:53
- गुलिक काल09:26 – 10:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:21 – 07:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
- चर(सामान्य)10:58 – 12:31
- लाभ(शुभ)12:31 – 14:03
- अमृत(शुभ)14:03 – 15:36
- काल(वर्जित (परंपरा))15:36 – 17:08
- शुभ(शुभ)17:08 – 18:41
रात
- अमृत(शुभ)18:41 – 20:08
- चर(सामान्य)20:08 – 21:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:36 – 23:03
- काल(वर्जित (परंपरा))23:03 – 00:31 (11 सित॰)
- लाभ(शुभ)00:31 (11 सित॰) – 01:59 (11 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:59 (11 सित॰) – 03:26 (11 सित॰)
- शुभ(शुभ)03:26 (11 सित॰) – 04:54 (11 सित॰)
- अमृत(शुभ)04:54 (11 सित॰) – 06:21 (11 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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