पंचांग 18 सितंबर 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 सितंबर 2037 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय14:34
चंद्रास्त01:57 (19 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु 01:51 (19 सित॰) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:51 (19 सित॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 07:36 (20 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 19:22 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 21:30 (19 सित॰) तक
योग
सौभाग्य 10:30 तक, फिर शोभन 10:32 (19 सित॰) तक
करण
तैतिल 17:10 तक, फिर गर 05:51 (19 सित॰) तक, फिर वणिज 18:40 (19 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:52
  • राहु काल10:57 – 12:28
  • यमगंड15:31 – 17:02
  • गुलिक काल07:54 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:22 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:28
  • शुभ(शुभ)12:28 – 13:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:31 – 17:02
  • चर(सामान्य)17:02 – 18:34

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:34 – 20:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:02 – 21:31
  • लाभ(शुभ)21:31 – 23:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:28 (19 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:28 (19 सित॰) – 01:57 (19 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:57 (19 सित॰) – 03:25 (19 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (19 सित॰) – 04:54 (19 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (19 सित॰) – 06:23 (19 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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