पंचांग 23 नवंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 नवंबर 2037 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:45
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय18:29
चंद्रास्त06:54
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 03:51 (24 नव॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 04:13 (25 नव॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 09:41 तक, फिर रोहिणी 10:54 (24 नव॰) तक
- योग
- शिव 02:58 (24 नव॰) तक, फिर सिद्ध 02:07 (25 नव॰) तक
- करण
- बालव 15:31 तक, फिर कौलव 03:51 (24 नव॰) तक, फिर तैतिल 16:05 (24 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:43
- राहु काल08:09 – 09:33
- यमगंड10:57 – 12:20
- गुलिक काल13:44 – 15:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:45 – 08:09
- काल(वर्जित (परंपरा))08:09 – 09:33
- शुभ(शुभ)09:33 – 10:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:20
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:44
- चर(सामान्य)13:44 – 15:08
- लाभ(शुभ)15:08 – 16:32
- अमृत(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- चर(सामान्य)17:56 – 19:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:32 – 21:08
- काल(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:44
- लाभ(शुभ)22:44 – 00:21 (24 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:21 (24 नव॰) – 01:57 (24 नव॰)
- शुभ(शुभ)01:57 (24 नव॰) – 03:33 (24 नव॰)
- अमृत(शुभ)03:33 (24 नव॰) – 05:10 (24 नव॰)
- चर(सामान्य)05:10 (24 नव॰) – 06:46 (24 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें