पंचांग 25 नवंबर 2038

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 नवंबर 2038 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:46
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय06:15 (26 नव॰)
चंद्रास्त17:02
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1960 · विक्रम (चैत्रादि) 2095
संवत्सर:
कालयुक्त (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
तुला 03:29 (26 नव॰) तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 22:59 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 19:16 (26 नव॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 11:43 तक, फिर विशाखा 08:45 (26 नव॰) तक
योग
शोभन 23:33 तक, फिर अतिगण्ड 19:17 (26 नव॰) तक
करण
विष्टि 12:51 तक, फिर शकुनि 22:59 तक, फिर चतुष्पद 09:07 (26 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:43
  • राहु काल13:45 – 15:08
  • यमगंड06:46 – 08:10
  • गुलिक काल09:34 – 10:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:46 – 08:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:34 – 10:57
  • चर(सामान्य)10:57 – 12:21
  • लाभ(शुभ)12:21 – 13:45
  • अमृत(शुभ)13:45 – 15:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
  • शुभ(शुभ)16:32 – 17:56

रात

  • अमृत(शुभ)17:56 – 19:32
  • चर(सामान्य)19:32 – 21:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:21 (26 नव॰)
  • लाभ(शुभ)00:21 (26 नव॰) – 01:58 (26 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (26 नव॰) – 03:34 (26 नव॰)
  • शुभ(शुभ)03:34 (26 नव॰) – 05:10 (26 नव॰)
  • अमृत(शुभ)05:10 (26 नव॰) – 06:47 (26 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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