पंचांग 17 जनवरी 2039

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 जनवरी 2039 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय00:45 (18 जन॰)
चंद्रास्त12:06
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1960 · विक्रम (चैत्रादि) 2095
संवत्सर:
कालयुक्त (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कन्या 18:54 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 13:07 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 11:12 (18 जन॰) तक
नक्षत्र
हस्त 07:27 तक, फिर चित्रा 06:16 (18 जन॰) तक, फिर स्वाती 04:51 (19 जन॰) तक
योग
सुकर्मा 19:38 तक, फिर धृति 16:48 (18 जन॰) तक
करण
बव 13:07 तक, फिर बालव 00:11 (18 जन॰) तक, फिर कौलव 11:12 (18 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:06
  • राहु काल08:33 – 09:57
  • यमगंड11:20 – 12:44
  • गुलिक काल14:08 – 15:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:09 – 08:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
  • शुभ(शुभ)09:57 – 11:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:44 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:31
  • लाभ(शुभ)15:31 – 16:55
  • अमृत(शुभ)16:55 – 18:19

रात

  • चर(सामान्य)18:19 – 19:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:55 – 21:31
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:31 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:44 (18 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:44 (18 जन॰) – 02:20 (18 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:20 (18 जन॰) – 03:57 (18 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:57 (18 जन॰) – 05:33 (18 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:33 (18 जन॰) – 07:09 (18 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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