पंचांग 17 सितंबर 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 सितंबर 2041 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय00:13 (18 सित॰)
चंद्रास्त13:08
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 10:31 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 23:23 तक, फिर कृष्ण नवमी 00:33 (19 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 23:10 तक, फिर आर्द्रा 00:57 (19 सित॰) तक
- योग
- सिद्धि 15:56 तक, फिर व्यतीपात 15:39 (18 सित॰) तक
- करण
- बालव 11:02 तक, फिर कौलव 23:23 तक, फिर तैतिल 11:54 (18 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
- राहु काल15:31 – 17:03
- यमगंड09:25 – 10:57
- गुलिक काल12:28 – 14:00
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:57
- लाभ(शुभ)10:57 – 12:28
- अमृत(शुभ)12:28 – 14:00
- काल(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:31
- शुभ(शुभ)15:31 – 17:03
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:03 – 18:35
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:03
- लाभ(शुभ)20:03 – 21:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:32 – 23:00
- शुभ(शुभ)23:00 – 00:28 (18 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:28 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
- चर(सामान्य)01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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