पंचांग 10 दिसंबर 2041
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 दिसंबर 2041 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:55
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय20:25
चंद्रास्त09:17
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- मिथुन 21:22 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 22:26 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 23:25 (11 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 03:41 (11 दिस॰) तक, फिर पुष्य 05:20 (12 दिस॰) तक
- योग
- शुक्ल 13:29 तक, फिर ब्रह्म 12:53 (11 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 10:11 तक, फिर विष्टि 22:26 तक, फिर बव 10:51 (11 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
- राहु काल15:13 – 16:35
- यमगंड09:41 – 11:04
- गुलिक काल12:27 – 13:50
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:55 – 08:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:18 – 09:41
- चर(सामान्य)09:41 – 11:04
- लाभ(शुभ)11:04 – 12:27
- अमृत(शुभ)12:27 – 13:50
- काल(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:13
- शुभ(शुभ)15:13 – 16:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:35
- लाभ(शुभ)19:35 – 21:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:50
- शुभ(शुभ)22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:04 (11 दिस॰) – 03:42 (11 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:42 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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