पंचांग 21 जनवरी 2042
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 जनवरी 2042 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त17:52
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1963 · विक्रम (चैत्रादि) 2098
- संवत्सर:
- दुर्मति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- धनु 13:50 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 02:11 (22 जन॰) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 23:14 (22 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 08:17 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 06:18 (22 जन॰) तक, फिर श्रवण 04:00 (23 जन॰) तक
- योग
- हर्षण 13:21 तक, फिर वज्र 09:52 (22 जन॰) तक
- करण
- चतुष्पद 15:33 तक, फिर नाग 02:11 (22 जन॰) तक, फिर किंस्तुघ्न 12:44 (22 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:08
- राहु काल15:33 – 16:57
- यमगंड09:57 – 11:21
- गुलिक काल12:45 – 14:09
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
- चर(सामान्य)09:57 – 11:21
- लाभ(शुभ)11:21 – 12:45
- अमृत(शुभ)12:45 – 14:09
- काल(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:33
- शुभ(शुभ)15:33 – 16:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:21
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:57
- लाभ(शुभ)19:57 – 21:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:33 – 23:09
- शुभ(शुभ)23:09 – 00:45 (22 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:45 (22 जन॰) – 02:21 (22 जन॰)
- चर(सामान्य)02:21 (22 जन॰) – 03:57 (22 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (22 जन॰) – 05:33 (22 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (22 जन॰) – 07:09 (22 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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