पंचांग 9 जनवरी 2043

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 जनवरी 2043 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय06:20 (10 जन॰)
चंद्रास्त16:24
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1965 · विक्रम (चैत्रादि) 2100
संवत्सर:
रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक 10:56 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 11:42 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 12:19 (10 जन॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 10:56 तक, फिर मूल 12:07 (10 जन॰) तक
योग
वृद्धि 14:59 तक, फिर ध्रुव 14:14 (10 जन॰) तक
करण
वणिज 11:42 तक, फिर विष्टि 00:05 (10 जन॰) तक, फिर शकुनि 12:19 (10 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:03
  • राहु काल11:18 – 12:41
  • यमगंड15:27 – 16:51
  • गुलिक काल08:32 – 09:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:08 – 08:32
  • लाभ(शुभ)08:32 – 09:55
  • अमृत(शुभ)09:55 – 11:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:18 – 12:41
  • शुभ(शुभ)12:41 – 14:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:51
  • चर(सामान्य)16:51 – 18:14

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:14 – 19:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:51 – 21:27
  • लाभ(शुभ)21:27 – 23:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:41 (10 जन॰)
  • शुभ(शुभ)00:41 (10 जन॰) – 02:18 (10 जन॰)
  • अमृत(शुभ)02:18 (10 जन॰) – 03:55 (10 जन॰)
  • चर(सामान्य)03:55 (10 जन॰) – 05:32 (10 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:32 (10 जन॰) – 07:09 (10 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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