पंचांग 1 जनवरी 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 जनवरी 2044 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय07:52
चंद्रास्त18:58
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1965 · विक्रम (चैत्रादि) 2100
संवत्सर:
रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु 20:52 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 17:21 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 19:08 (2 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 14:16 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 16:33 (2 जन॰) तक
योग
ध्रुव 09:14 तक, फिर व्याघात 09:32 (2 जन॰) तक
करण
बव 17:21 तक, फिर बालव 06:17 (2 जन॰) तक, फिर कौलव 19:08 (2 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
  • राहु काल11:15 – 12:37
  • यमगंड15:23 – 16:46
  • गुलिक काल08:29 – 09:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:06 – 08:29
  • लाभ(शुभ)08:29 – 09:52
  • अमृत(शुभ)09:52 – 11:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:15 – 12:37
  • शुभ(शुभ)12:37 – 14:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:46
  • चर(सामान्य)16:46 – 18:09

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:46 – 21:23
  • लाभ(शुभ)21:23 – 23:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:38 (2 जन॰)
  • शुभ(शुभ)00:38 (2 जन॰) – 02:15 (2 जन॰)
  • अमृत(शुभ)02:15 (2 जन॰) – 03:52 (2 जन॰)
  • चर(सामान्य)03:52 (2 जन॰) – 05:29 (2 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:29 (2 जन॰) – 07:06 (2 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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