पंचांग 20 जनवरी 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 जनवरी 2044 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय23:44
चंद्रास्त11:03
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1965 · विक्रम (चैत्रादि) 2100
- संवत्सर:
- रुधिरोद्गारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 15:13 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 16:25 (21 जन॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 02:24 (21 जन॰) तक, फिर चित्रा 04:25 (22 जन॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 10:00 तक, फिर सुकर्मा 09:37 (21 जन॰) तक
- करण
- वणिज 15:13 तक, फिर विष्टि 03:44 (21 जन॰) तक, फिर बव 16:25 (21 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:45 – 14:09
- यमगंड08:33 – 09:57
- गुलिक काल11:21 – 12:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
- अमृत(शुभ)08:33 – 09:57
- काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
- शुभ(शुभ)11:21 – 12:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:33
- चर(सामान्य)15:33 – 16:57
- लाभ(शुभ)16:57 – 18:20
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:20 – 19:57
- शुभ(शुभ)19:57 – 21:33
- अमृत(शुभ)21:33 – 23:09
- चर(सामान्य)23:09 – 00:45 (21 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:45 (21 जन॰) – 02:21 (21 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (21 जन॰) – 03:57 (21 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (21 जन॰) – 05:33 (21 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (21 जन॰) – 07:09 (21 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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