पंचांग 19 अप्रैल 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 अप्रैल 2044 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय01:00 (20 अप्रैल)
चंद्रास्त11:14
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
धनु 04:10 (20 अप्रैल) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 04:15 (20 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 06:14 (21 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 21:29 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 00:07 (21 अप्रैल) तक
योग
शिव 10:45 तक, फिर सिद्ध 11:31 (20 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 15:07 तक, फिर बव 04:15 (20 अप्रैल) तक, फिर बालव 17:18 (20 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
  • राहु काल15:43 – 17:18
  • यमगंड09:24 – 10:58
  • गुलिक काल12:33 – 14:08

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:14 – 07:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:49 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:58
  • लाभ(शुभ)10:58 – 12:33
  • अमृत(शुभ)12:33 – 14:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:52

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:17
  • लाभ(शुभ)20:17 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:08
  • शुभ(शुभ)23:08 – 00:33 (20 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:33 (20 अप्रैल) – 01:58 (20 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)01:58 (20 अप्रैल) – 03:23 (20 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:23 (20 अप्रैल) – 04:48 (20 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:48 (20 अप्रैल) – 06:13 (20 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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