पंचांग 21 जून 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 जून 2044 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय02:35 (22 जून)
चंद्रास्त14:58
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 08:14 तक, फिर कृष्ण एकादशी 05:58 (22 जून) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 03:02 (23 जून) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 20:51 तक, फिर भरणी 18:59 (22 जून) तक
- योग
- अतिगण्ड 21:15 तक, फिर सुकर्मा 18:01 (22 जून) तक
- करण
- विष्टि 08:14 तक, फिर बव 19:11 तक, फिर बालव 05:58 (22 जून) तक, फिर कौलव 16:34 (22 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:02
- राहु काल15:55 – 17:34
- यमगंड09:17 – 10:57
- गुलिक काल12:36 – 14:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:59 – 07:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:38 – 09:17
- चर(सामान्य)09:17 – 10:57
- लाभ(शुभ)10:57 – 12:36
- अमृत(शुभ)12:36 – 14:15
- काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:55
- शुभ(शुभ)15:55 – 17:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:13
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:34
- लाभ(शुभ)20:34 – 21:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:55 – 23:15
- शुभ(शुभ)23:15 – 00:36 (22 जून)
- अमृत(शुभ)00:36 (22 जून) – 01:57 (22 जून)
- चर(सामान्य)01:57 (22 जून) – 03:18 (22 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:18 (22 जून) – 04:38 (22 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:38 (22 जून) – 05:59 (22 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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