पंचांग 31 अगस्त 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अगस्त 2044 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय13:46
चंद्रास्त00:45 (1 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृश्चिक 00:31 (1 सित॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 06:05 (1 सित॰) तक, फिर शुक्ल दशमी 08:30 (2 सित॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:31 (1 सित॰) तक, फिर मूल 03:28 (2 सित॰) तक
योग
विष्कम्भ 22:17 तक, फिर प्रीति 23:11 (1 सित॰) तक
करण
बालव 16:55 तक, फिर कौलव 06:05 (1 सित॰) तक, फिर तैतिल 19:18 (1 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:34 – 14:08
  • यमगंड07:53 – 09:27
  • गुलिक काल11:00 – 12:34

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:19 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:00
  • शुभ(शुभ)11:00 – 12:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:42
  • चर(सामान्य)15:42 – 17:15
  • लाभ(शुभ)17:15 – 18:49

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:15
  • शुभ(शुभ)20:15 – 21:42
  • अमृत(शुभ)21:42 – 23:08
  • चर(सामान्य)23:08 – 00:34 (1 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (1 सित॰) – 02:01 (1 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (1 सित॰) – 03:27 (1 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (1 सित॰) – 04:53 (1 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (1 सित॰) – 06:20 (1 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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