पंचांग 15 सितंबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 सितंबर 2044 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय00:52 (16 सित॰)
चंद्रास्त13:45
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 08:21 तक, फिर कृष्ण नवमी 06:02 (16 सित॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 03:36 (17 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 12:07 तक, फिर आर्द्रा 10:32 (16 सित॰) तक
योग
सिद्धि 09:04 तक, फिर व्यतीपात 06:05 (16 सित॰) तक, फिर वरीयान 02:59 (17 सित॰) तक
करण
कौलव 08:21 तक, फिर तैतिल 19:13 तक, फिर गर 06:02 (16 सित॰) तक, फिर वणिज 16:50 (16 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:53
  • राहु काल14:01 – 15:33
  • यमगंड06:22 – 07:54
  • गुलिक काल09:25 – 10:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:22 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:57
  • चर(सामान्य)10:57 – 12:29
  • लाभ(शुभ)12:29 – 14:01
  • अमृत(शुभ)14:01 – 15:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:33 – 17:04
  • शुभ(शुभ)17:04 – 18:36

रात

  • अमृत(शुभ)18:36 – 20:04
  • चर(सामान्य)20:04 – 21:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:33 – 23:01
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:29 (16 सित॰)
  • लाभ(शुभ)00:29 (16 सित॰) – 01:57 (16 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:57 (16 सित॰) – 03:26 (16 सित॰)
  • शुभ(शुभ)03:26 (16 सित॰) – 04:54 (16 सित॰)
  • अमृत(शुभ)04:54 (16 सित॰) – 06:22 (16 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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