पंचांग 29 नवंबर 2044

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 नवंबर 2044 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:49
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय13:39
चंद्रास्त02:02 (30 नव॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कुंभ 12:34 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 15:05 तक, फिर शुक्ल दशमी 15:22 (30 नव॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 18:53 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 19:36 (30 नव॰) तक
योग
वज्र 00:25 (30 नव॰) तक, फिर सिद्धि 23:13 (30 नव॰) तक
करण
कौलव 15:05 तक, फिर तैतिल 03:21 (30 नव॰) तक, फिर गर 15:22 (30 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:45
  • राहु काल15:09 – 16:32
  • यमगंड09:36 – 10:59
  • गुलिक काल12:22 – 13:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:49 – 08:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:12 – 09:36
  • चर(सामान्य)09:36 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:22
  • अमृत(शुभ)12:22 – 13:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:09
  • शुभ(शुभ)15:09 – 16:32
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
  • लाभ(शुभ)19:33 – 21:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:46
  • शुभ(शुभ)22:46 – 00:23 (30 नव॰)
  • अमृत(शुभ)00:23 (30 नव॰) – 01:59 (30 नव॰)
  • चर(सामान्य)01:59 (30 नव॰) – 03:36 (30 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:36 (30 नव॰) – 05:13 (30 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:13 (30 नव॰) – 06:50 (30 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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