पंचांग 29 दिसंबर 2044
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
29 दिसंबर 2044 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय13:22
चंद्रास्त02:33 (30 दिस॰)
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1966 · विक्रम (चैत्रादि) 2101
- संवत्सर:
- रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 07:41 तक, फिर शुक्ल दशमी 06:43 (30 दिस॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 04:54 (31 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 04:41 (30 दिस॰) तक, फिर भरणी 03:36 (31 दिस॰) तक
- योग
- शिव 02:57 (30 दिस॰) तक, फिर सिद्ध 00:22 (31 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 07:41 तक, फिर तैतिल 19:19 तक, फिर गर 06:43 (30 दिस॰) तक, फिर वणिज 17:54 (30 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 12:58
- राहु काल13:59 – 15:22
- यमगंड07:05 – 08:28
- गुलिक काल09:51 – 11:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)07:05 – 08:28
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:51 – 11:14
- चर(सामान्य)11:14 – 12:36
- लाभ(शुभ)12:36 – 13:59
- अमृत(शुभ)13:59 – 15:22
- काल(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:45
- शुभ(शुभ)16:45 – 18:07
रात
- अमृत(शुभ)18:07 – 19:45
- चर(सामान्य)19:45 – 21:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:22 – 22:59
- काल(वर्जित (परंपरा))22:59 – 00:36 (30 दिस॰)
- लाभ(शुभ)00:36 (30 दिस॰) – 02:14 (30 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:14 (30 दिस॰) – 03:51 (30 दिस॰)
- शुभ(शुभ)03:51 (30 दिस॰) – 05:28 (30 दिस॰)
- अमृत(शुभ)05:28 (30 दिस॰) – 07:06 (30 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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