पंचांग 28 जून 2045
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 जून 2045 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय18:41
चंद्रास्त05:44 (29 जून)
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 10:19 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 11:14 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 12:45 (29 जून) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 10:19 तक, फिर मूल 12:28 (29 जून) तक
- योग
- शुक्ल 00:03 (29 जून) तक, फिर ब्रह्म 00:28 (30 जून) तक
- करण
- वणिज 11:14 तक, फिर विष्टि 23:56 तक, फिर बव 12:45 (29 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:37 – 14:17
- यमगंड07:40 – 09:19
- गुलिक काल10:58 – 12:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:00 – 07:40
- अमृत(शुभ)07:40 – 09:19
- काल(वर्जित (परंपरा))09:19 – 10:58
- शुभ(शुभ)10:58 – 12:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
- चर(सामान्य)15:56 – 17:35
- लाभ(शुभ)17:35 – 19:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
- शुभ(शुभ)20:35 – 21:56
- अमृत(शुभ)21:56 – 23:17
- चर(सामान्य)23:17 – 00:38 (29 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (29 जून) – 01:58 (29 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (29 जून) – 03:19 (29 जून)
- लाभ(शुभ)03:19 (29 जून) – 04:40 (29 जून)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:40 (29 जून) – 06:01 (29 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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