पंचांग 17 अगस्त 2045

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 अगस्त 2045 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय10:41
चंद्रास्त22:20
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कन्या 07:29 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 07:40 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 06:12 (18 अग॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 05:29 (19 अग॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 19:02 तक, फिर स्वाती 18:41 (18 अग॰) तक
योग
शुभ 18:07 तक, फिर शुक्ल 16:09 (18 अग॰) तक
करण
बालव 07:40 तक, फिर कौलव 18:51 तक, फिर तैतिल 06:12 (18 अग॰) तक, फिर गर 17:45 (18 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
  • राहु काल14:13 – 15:49
  • यमगंड06:16 – 07:52
  • गुलिक काल09:27 – 11:03

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:16 – 07:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • चर(सामान्य)11:03 – 12:38
  • लाभ(शुभ)12:38 – 14:13
  • अमृत(शुभ)14:13 – 15:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:49 – 17:24
  • शुभ(शुभ)17:24 – 19:00

रात

  • अमृत(शुभ)19:00 – 20:24
  • चर(सामान्य)20:24 – 21:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:38 (18 अग॰)
  • लाभ(शुभ)00:38 (18 अग॰) – 02:03 (18 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (18 अग॰) – 03:27 (18 अग॰)
  • शुभ(शुभ)03:27 (18 अग॰) – 04:52 (18 अग॰)
  • अमृत(शुभ)04:52 (18 अग॰) – 06:17 (18 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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