पंचांग 8 सितंबर 2045
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 सितंबर 2045 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय04:17 (9 सित॰)
चंद्रास्त16:38
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 17:28 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 14:04 (9 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 18:57 तक, फिर आश्लेषा 16:20 (9 सित॰) तक
- योग
- परिघ 02:17 (9 सित॰) तक, फिर शिव 22:19 (9 सित॰) तक
- करण
- कौलव 07:03 तक, फिर तैतिल 17:28 तक, फिर गर 03:48 (9 सित॰) तक, फिर वणिज 14:04 (9 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
- राहु काल10:59 – 12:32
- यमगंड15:37 – 17:10
- गुलिक काल07:53 – 09:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:21 – 07:53
- लाभ(शुभ)07:53 – 09:26
- अमृत(शुभ)09:26 – 10:59
- काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
- शुभ(शुभ)12:32 – 14:04
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:37
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:37 – 17:10
- चर(सामान्य)17:10 – 18:42
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:10
- काल(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:37
- लाभ(शुभ)21:37 – 23:04
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:32 (9 सित॰)
- शुभ(शुभ)00:32 (9 सित॰) – 01:59 (9 सित॰)
- अमृत(शुभ)01:59 (9 सित॰) – 03:26 (9 सित॰)
- चर(सामान्य)03:26 (9 सित॰) – 04:54 (9 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (9 सित॰) – 06:21 (9 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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