पंचांग 21 अक्टूबर 2045

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अक्टूबर 2045 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय15:18
चंद्रास्त03:21 (22 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 21:20 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 23:32 (22 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 05:04 (22 अक्टू॰) तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 07:37 (23 अक्टू॰) तक
योग
गण्ड 08:19 तक, फिर वृद्धि 09:07 (22 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 08:06 तक, फिर विष्टि 21:20 तक, फिर बव 10:29 (22 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
  • राहु काल09:24 – 10:51
  • यमगंड13:46 – 15:13
  • गुलिक काल06:30 – 07:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:30 – 07:57
  • शुभ(शुभ)07:57 – 09:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
  • चर(सामान्य)12:19 – 13:46
  • लाभ(शुभ)13:46 – 15:13
  • अमृत(शुभ)15:13 – 16:40
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:40 – 18:07

रात

  • लाभ(शुभ)18:07 – 19:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:40 – 21:13
  • शुभ(शुभ)21:13 – 22:46
  • अमृत(शुभ)22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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