पंचांग 7 नवंबर 2045

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 नवंबर 2045 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:37
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय05:50 (8 नव॰)
चंद्रास्त16:37
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कन्या 13:06 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 07:17 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:08 (8 नव॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 03:18 (9 नव॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 00:23 (8 नव॰) तक, फिर स्वाती 23:10 (8 नव॰) तक
योग
प्रीति 22:22 तक, फिर आयुष्मान 19:36 (8 नव॰) तक
करण
वणिज 07:17 तक, फिर विष्टि 18:11 तक, फिर शकुनि 05:08 (8 नव॰) तक, फिर चतुष्पद 16:10 (8 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
  • राहु काल15:08 – 16:33
  • यमगंड09:27 – 10:52
  • गुलिक काल12:18 – 13:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:37 – 08:02
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:02 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:18
  • अमृत(शुभ)12:18 – 13:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • शुभ(शुभ)15:08 – 16:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:59

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:33
  • लाभ(शुभ)19:33 – 21:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
  • शुभ(शुभ)22:43 – 00:18 (8 नव॰)
  • अमृत(शुभ)00:18 (8 नव॰) – 01:53 (8 नव॰)
  • चर(सामान्य)01:53 (8 नव॰) – 03:27 (8 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (8 नव॰) – 05:02 (8 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:02 (8 नव॰) – 06:37 (8 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें