पंचांग 6 दिसंबर 2045
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 दिसंबर 2045 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:53
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय05:39 (7 दिस॰)
चंद्रास्त16:01
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला 00:56 (7 दिस॰) तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 18:21 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 17:32 (7 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 07:14 तक, फिर विशाखा 06:52 (7 दिस॰) तक, फिर अनुराधा 06:55 (8 दिस॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 23:58 तक, फिर सुकर्मा 22:12 (7 दिस॰) तक
- करण
- गर 06:54 तक, फिर वणिज 18:21 तक, फिर विष्टि 05:54 (7 दिस॰) तक, फिर शकुनि 17:32 (7 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:25 – 13:48
- यमगंड08:16 – 09:39
- गुलिक काल11:02 – 12:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:53 – 08:16
- अमृत(शुभ)08:16 – 09:39
- काल(वर्जित (परंपरा))09:39 – 11:02
- शुभ(शुभ)11:02 – 12:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:48
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:11
- चर(सामान्य)15:11 – 16:34
- लाभ(शुभ)16:34 – 17:57
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:34
- शुभ(शुभ)19:34 – 21:11
- अमृत(शुभ)21:11 – 22:48
- चर(सामान्य)22:48 – 00:25 (7 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:25 (7 दिस॰) – 02:02 (7 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (7 दिस॰) – 03:40 (7 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:40 (7 दिस॰) – 05:17 (7 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:17 (7 दिस॰) – 06:54 (7 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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