पंचांग 3 जनवरी 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 जनवरी 2046 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय04:31 (4 जन॰)
चंद्रास्त14:46
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
तुला 07:16 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 07:54 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 07:43 (4 जन॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 13:20 तक, फिर अनुराधा 13:50 (4 जन॰) तक
योग
शूल 03:04 (4 जन॰) तक, फिर गण्ड 01:59 (5 जन॰) तक
करण
बालव 07:54 तक, फिर कौलव 19:45 तक, फिर तैतिल 07:43 (4 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:01
  • यमगंड08:30 – 09:53
  • गुलिक काल11:16 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:07 – 08:30
  • अमृत(शुभ)08:30 – 09:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:16
  • शुभ(शुभ)11:16 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:01 – 15:24
  • चर(सामान्य)15:24 – 16:47
  • लाभ(शुभ)16:47 – 18:10

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:10 – 19:47
  • शुभ(शुभ)19:47 – 21:24
  • अमृत(शुभ)21:24 – 23:02
  • चर(सामान्य)23:02 – 00:39 (4 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (4 जन॰) – 02:16 (4 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:16 (4 जन॰) – 03:53 (4 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:53 (4 जन॰) – 05:30 (4 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:30 (4 जन॰) – 07:07 (4 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें