पंचांग 17 मार्च 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 मार्च 2046 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:41
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय13:35
चंद्रास्त03:13 (18 मार्च)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1967 · विक्रम (चैत्रादि) 2102
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन 02:03 (18 मार्च) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 09:12 तक, फिर शुक्ल दशमी 07:21 (18 मार्च) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:50 तक, फिर पुनर्वसु 07:42 (18 मार्च) तक
योग
सौभाग्य 10:41 तक, फिर शोभन 08:00 (18 मार्च) तक
करण
कौलव 09:12 तक, फिर तैतिल 20:22 तक, फिर गर 07:21 (18 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:07
  • राहु काल09:42 – 11:12
  • यमगंड14:13 – 15:43
  • गुलिक काल06:41 – 08:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:41 – 08:11
  • शुभ(शुभ)08:11 – 09:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:42 – 11:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:43
  • चर(सामान्य)12:43 – 14:13
  • लाभ(शुभ)14:13 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:44

रात

  • लाभ(शुभ)18:44 – 20:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:13
  • अमृत(शुभ)23:13 – 00:42 (18 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:42 (18 मार्च) – 02:12 (18 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:12 (18 मार्च) – 03:41 (18 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:41 (18 मार्च) – 05:10 (18 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:10 (18 मार्च) – 06:40 (18 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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