पंचांग 23 अप्रैल 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 अप्रैल 2046 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:12
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय21:48
चंद्रास्त07:59
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 16:08 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 14:52 (24 अप्रैल) तक
नक्षत्र
अनुराधा 19:07 तक, फिर ज्येष्ठा 18:41 (24 अप्रैल) तक
योग
वरीयान 02:04 (24 अप्रैल) तक, फिर परिघ 00:15 (25 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 16:08 तक, फिर बव 03:24 (24 अप्रैल) तक, फिर बालव 14:52 (24 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
  • राहु काल07:47 – 09:22
  • यमगंड10:57 – 12:33
  • गुलिक काल14:08 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:12 – 07:47
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:47 – 09:22
  • शुभ(शुभ)09:22 – 10:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:18
  • अमृत(शुभ)17:18 – 18:53

रात

  • चर(सामान्य)18:53 – 20:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:18 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
  • लाभ(शुभ)23:07 – 00:32 (24 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (24 अप्रैल) – 01:57 (24 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)01:57 (24 अप्रैल) – 03:22 (24 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:22 (24 अप्रैल) – 04:46 (24 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:46 (24 अप्रैल) – 06:11 (24 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें