पंचांग 9 मई 2046
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 मई 2046 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:03
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय08:22
चंद्रास्त22:10
- मास:
- वैशाख (अमांत)
- संवत:
- शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
- संवत्सर:
- क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- वृषभ 08:41 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 09:03 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 08:30 (10 मई) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 20:48 तक, फिर आर्द्रा 20:48 (10 मई) तक
- योग
- सुकर्मा 00:10 (10 मई) तक, फिर धृति 22:30 (10 मई) तक
- करण
- गर 09:03 तक, फिर वणिज 20:49 तक, फिर विष्टि 08:30 (10 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:31 – 14:08
- यमगंड07:40 – 09:17
- गुलिक काल10:54 – 12:31
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:03 – 07:40
- अमृत(शुभ)07:40 – 09:17
- काल(वर्जित (परंपरा))09:17 – 10:54
- शुभ(शुभ)10:54 – 12:31
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:45
- चर(सामान्य)15:45 – 17:22
- लाभ(शुभ)17:22 – 18:58
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:58 – 20:21
- शुभ(शुभ)20:21 – 21:44
- अमृत(शुभ)21:44 – 23:07
- चर(सामान्य)23:07 – 00:30 (10 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:30 (10 मई) – 01:53 (10 मई)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (10 मई) – 03:16 (10 मई)
- लाभ(शुभ)03:16 (10 मई) – 04:39 (10 मई)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:39 (10 मई) – 06:02 (10 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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