पंचांग 5 अगस्त 2046
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 अगस्त 2046 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:13
सूर्यास्त19:07
चंद्रोदय08:57
चंद्रास्त21:17
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
- संवत्सर:
- क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- सिंह 15:45 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 06:31 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 03:23 (6 अग॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 00:27 (7 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 10:20 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 08:02 (6 अग॰) तक
- योग
- परिघ 07:36 तक, फिर शिव 03:58 (6 अग॰) तक, फिर सिद्ध 00:30 (7 अग॰) तक
- करण
- गर 06:31 तक, फिर वणिज 16:56 तक, फिर विष्टि 03:23 (6 अग॰) तक, फिर बव 13:53 (6 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल17:30 – 19:07
- यमगंड12:40 – 14:17
- गुलिक काल15:54 – 17:30
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:50
- चर(सामान्य)07:50 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 11:03
- अमृत(शुभ)11:03 – 12:40
- काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:17
- शुभ(शुभ)14:17 – 15:54
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:54 – 17:30
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:30 – 19:07
रात
- शुभ(शुभ)19:07 – 20:30
- अमृत(शुभ)20:30 – 21:54
- चर(सामान्य)21:54 – 23:17
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:40 (6 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (6 अग॰) – 02:03 (6 अग॰)
- लाभ(शुभ)02:03 (6 अग॰) – 03:27 (6 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (6 अग॰) – 04:50 (6 अग॰)
- शुभ(शुभ)04:50 (6 अग॰) – 06:13 (6 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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