पंचांग 22 अगस्त 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 अगस्त 2046 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:56
चंद्रोदय22:13
चंद्रास्त10:40
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:48 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 09:52 (23 अग॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 01:08 (23 अग॰) तक, फिर भरणी 03:30 (24 अग॰) तक
योग
गण्ड 15:11 तक, फिर वृद्धि 15:46 (23 अग॰) तक
करण
तैतिल 07:48 तक, फिर गर 20:53 तक, फिर वणिज 09:52 (23 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:12
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:02 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:17 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:47
  • चर(सामान्य)15:47 – 17:21
  • लाभ(शुभ)17:21 – 18:56

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:56 – 20:21
  • शुभ(शुभ)20:21 – 21:47
  • अमृत(शुभ)21:47 – 23:12
  • चर(सामान्य)23:12 – 00:37 (23 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (23 अग॰) – 02:02 (23 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (23 अग॰) – 03:27 (23 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (23 अग॰) – 04:53 (23 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (23 अग॰) – 06:18 (23 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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