पंचांग 29 अगस्त 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 अगस्त 2046 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय04:34 (30 अग॰)
चंद्रास्त16:56
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 09:10 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 06:33 (30 अग॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 03:47 (30 अग॰) तक, फिर आश्लेषा 01:30 (31 अग॰) तक
योग
व्यतीपात 08:41 तक, फिर वरीयान 05:28 (30 अग॰) तक, फिर परिघ 01:50 (31 अग॰) तक
करण
तैतिल 09:10 तक, फिर गर 19:55 तक, फिर वणिज 06:33 (30 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:35 – 14:09
  • यमगंड07:53 – 09:27
  • गुलिक काल11:01 – 12:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:19 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
  • शुभ(शुभ)11:01 – 12:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:17
  • लाभ(शुभ)17:17 – 18:51

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:51 – 20:17
  • शुभ(शुभ)20:17 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:35 (30 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (30 अग॰) – 02:01 (30 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (30 अग॰) – 03:27 (30 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (30 अग॰) – 04:53 (30 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (30 अग॰) – 06:19 (30 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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