पंचांग 23 सितंबर 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 सितंबर 2046 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय00:14 (24 सित॰)
चंद्रास्त13:03
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 01:44 (24 सित॰) तक, फिर कृष्ण नवमी 01:06 (25 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 15:03 तक, फिर आर्द्रा 15:25 (24 सित॰) तक
योग
व्यतीपात 21:53 तक, फिर वरीयान 20:25 (24 सित॰) तक
करण
बालव 13:45 तक, फिर कौलव 01:44 (24 सित॰) तक, फिर तैतिल 13:31 (24 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:51
  • राहु काल16:59 – 18:29
  • यमगंड12:26 – 13:57
  • गुलिक काल15:28 – 16:59

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:56
  • अमृत(शुभ)10:56 – 12:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:57
  • शुभ(शुभ)13:57 – 15:28
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:28 – 16:59
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:59 – 18:29

रात

  • शुभ(शुभ)18:29 – 19:59
  • अमृत(शुभ)19:59 – 21:28
  • चर(सामान्य)21:28 – 22:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:57 – 00:26 (24 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:26 (24 सित॰) – 01:56 (24 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:56 (24 सित॰) – 03:25 (24 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (24 सित॰) – 04:54 (24 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (24 सित॰) – 06:23 (24 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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