पंचांग 3 अक्टूबर 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 अक्टूबर 2046 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय09:38
चंद्रास्त20:56
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
तुला 11:31 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:06 तक, फिर शुक्ल पंचमी 15:58 (4 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 17:03 तक, फिर अनुराधा 15:37 (4 अक्टू॰) तक
योग
विष्कम्भ 07:52 तक, फिर प्रीति 04:42 (4 अक्टू॰) तक, फिर आयुष्मान 02:08 (5 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 07:26 तक, फिर विष्टि 18:06 तक, फिर बव 04:56 (4 अक्टू॰) तक, फिर बालव 15:58 (4 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:23 – 13:52
  • यमगंड07:54 – 09:24
  • गुलिक काल10:53 – 12:23

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:25 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:52 – 15:22
  • चर(सामान्य)15:22 – 16:51
  • लाभ(शुभ)16:51 – 18:21

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:51
  • शुभ(शुभ)19:51 – 21:22
  • अमृत(शुभ)21:22 – 22:53
  • चर(सामान्य)22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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