पंचांग 12 अक्टूबर 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 अक्टूबर 2046 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय16:33
चंद्रास्त04:57 (13 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कुंभ 22:03 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 00:16 (13 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 02:47 (14 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 04:48 (13 अक्टू॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 07:47 (14 अक्टू॰) तक
योग
वृद्धि 01:09 (13 अक्टू॰) तक, फिर ध्रुव 02:04 (14 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 11:01 तक, फिर तैतिल 00:16 (13 अक्टू॰) तक, फिर गर 13:32 (13 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल10:52 – 12:20
  • यमगंड15:17 – 16:45
  • गुलिक काल07:55 – 09:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:27 – 07:55
  • लाभ(शुभ)07:55 – 09:24
  • अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:20
  • शुभ(शुभ)12:20 – 13:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:17 – 16:45
  • चर(सामान्य)16:45 – 18:14

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:14 – 19:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:45 – 21:17
  • लाभ(शुभ)21:17 – 22:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:21 (13 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)00:21 (13 अक्टू॰) – 01:52 (13 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)01:52 (13 अक्टू॰) – 03:24 (13 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)03:24 (13 अक्टू॰) – 04:56 (13 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:56 (13 अक्टू॰) – 06:27 (13 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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