पंचांग 19 अक्टूबर 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 अक्टूबर 2046 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय21:12
चंद्रास्त10:03
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 12:34 तक, फिर कृष्ण पंचमी 13:33 (20 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 19:52 तक, फिर मृगशीर्ष 21:17 (20 अक्टू॰) तक
योग
वरीयान 04:25 (20 अक्टू॰) तक, फिर परिघ 03:51 (21 अक्टू॰) तक
करण
बालव 12:34 तक, फिर कौलव 01:07 (20 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 13:33 (20 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:42
  • राहु काल10:51 – 12:19
  • यमगंड15:14 – 16:41
  • गुलिक काल07:56 – 09:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:29 – 07:56
  • लाभ(शुभ)07:56 – 09:24
  • अमृत(शुभ)09:24 – 10:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
  • शुभ(शुभ)12:19 – 13:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:41
  • चर(सामान्य)16:41 – 18:09

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:41
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:14
  • लाभ(शुभ)21:14 – 22:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:19 (20 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)00:19 (20 अक्टू॰) – 01:52 (20 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)01:52 (20 अक्टू॰) – 03:24 (20 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)03:24 (20 अक्टू॰) – 04:57 (20 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:57 (20 अक्टू॰) – 06:29 (20 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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