पंचांग 16 नवंबर 2046

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 नवंबर 2046 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:41
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय20:03
चंद्रास्त08:53
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृषभ 14:12 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:45 (17 नव॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 02:04 (18 नव॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 02:47 (17 नव॰) तक, फिर आर्द्रा 03:40 (18 नव॰) तक
योग
शिव 08:59 तक, फिर सिद्ध 08:18 (17 नव॰) तक
करण
वणिज 13:27 तक, फिर विष्टि 01:45 (17 नव॰) तक, फिर बव 13:58 (17 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
  • राहु काल10:54 – 12:19
  • यमगंड15:07 – 16:32
  • गुलिक काल08:05 – 09:30

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:41 – 08:05
  • लाभ(शुभ)08:05 – 09:30
  • अमृत(शुभ)09:30 – 10:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:19
  • शुभ(शुभ)12:19 – 13:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:07 – 16:32
  • चर(सामान्य)16:32 – 17:56

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:32 – 21:08
  • लाभ(शुभ)21:08 – 22:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:19 (17 नव॰)
  • शुभ(शुभ)00:19 (17 नव॰) – 01:55 (17 नव॰)
  • अमृत(शुभ)01:55 (17 नव॰) – 03:30 (17 नव॰)
  • चर(सामान्य)03:30 (17 नव॰) – 05:06 (17 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:06 (17 नव॰) – 06:42 (17 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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