पंचांग 26 नवंबर 2046
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 नवंबर 2046 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय05:59 (27 नव॰)
चंद्रास्त16:24
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
- संवत्सर:
- क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 09:18 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 06:12 (27 नव॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 03:19 (28 नव॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 16:33 तक, फिर विशाखा 14:15 (27 नव॰) तक
- योग
- शोभन 02:57 (27 नव॰) तक, फिर अतिगण्ड 23:20 (27 नव॰) तक
- करण
- वणिज 09:18 तक, फिर विष्टि 19:44 तक, फिर शकुनि 06:12 (27 नव॰) तक, फिर चतुष्पद 16:44 (27 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:43
- राहु काल08:10 – 09:34
- यमगंड10:58 – 12:21
- गुलिक काल13:45 – 15:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:47 – 08:10
- काल(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:34
- शुभ(शुभ)09:34 – 10:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:45
- चर(सामान्य)13:45 – 15:08
- लाभ(शुभ)15:08 – 16:32
- अमृत(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- चर(सामान्य)17:56 – 19:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:32 – 21:09
- काल(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:45
- लाभ(शुभ)22:45 – 00:22 (27 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:22 (27 नव॰) – 01:58 (27 नव॰)
- शुभ(शुभ)01:58 (27 नव॰) – 03:34 (27 नव॰)
- अमृत(शुभ)03:34 (27 नव॰) – 05:11 (27 नव॰)
- चर(सामान्य)05:11 (27 नव॰) – 06:47 (27 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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