पंचांग 11 जनवरी 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जनवरी 2047 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय17:40
चंद्रास्तनहीं
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1968 · विक्रम (चैत्रादि) 2103
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 07:38 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 06:51 (12 जन॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 05:34 (13 जन॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 18:01 तक, फिर पुनर्वसु 17:37 (12 जन॰) तक
योग
इन्द्र 18:00 तक, फिर वैधृति 15:58 (12 जन॰) तक
करण
वणिज 07:38 तक, फिर विष्टि 19:18 तक, फिर बव 06:51 (12 जन॰) तक, फिर बालव 18:16 (12 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:04
  • राहु काल11:19 – 12:42
  • यमगंड15:28 – 16:52
  • गुलिक काल08:32 – 09:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:09 – 08:32
  • लाभ(शुभ)08:32 – 09:55
  • अमृत(शुभ)09:55 – 11:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:19 – 12:42
  • शुभ(शुभ)12:42 – 14:05
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:28 – 16:52
  • चर(सामान्य)16:52 – 18:15

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:15 – 19:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:52 – 21:28
  • लाभ(शुभ)21:28 – 23:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:05 – 00:42 (12 जन॰)
  • शुभ(शुभ)00:42 (12 जन॰) – 02:19 (12 जन॰)
  • अमृत(शुभ)02:19 (12 जन॰) – 03:55 (12 जन॰)
  • चर(सामान्य)03:55 (12 जन॰) – 05:32 (12 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:32 (12 जन॰) – 07:09 (12 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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