पंचांग 30 मार्च 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 मार्च 2047 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय08:35
चंद्रास्त22:04
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मेष 19:46 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 03:00 (31 मार्च) तक, फिर शुक्ल पंचमी 05:13 (1 अप्रैल) तक
नक्षत्र
भरणी 13:02 तक, फिर कृत्तिका 15:53 (31 मार्च) तक
योग
विष्कम्भ 16:08 तक, फिर प्रीति 16:55 (31 मार्च) तक
करण
वणिज 13:48 तक, फिर विष्टि 03:00 (31 मार्च) तक, फिर बव 16:08 (31 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल09:34 – 11:07
  • यमगंड14:11 – 15:43
  • गुलिक काल06:30 – 08:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:30 – 08:02
  • शुभ(शुभ)08:02 – 09:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:34 – 11:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:39
  • चर(सामान्य)12:39 – 14:11
  • लाभ(शुभ)14:11 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47

रात

  • लाभ(शुभ)18:47 – 20:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:38 (31 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:38 (31 मार्च) – 02:06 (31 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:06 (31 मार्च) – 03:34 (31 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:34 (31 मार्च) – 05:02 (31 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:02 (31 मार्च) – 06:29 (31 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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