पंचांग 26 अप्रैल 2047
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 अप्रैल 2047 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:10
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय06:34
चंद्रास्त19:59
- मास:
- वैशाख (अमांत)
- संवत:
- शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष 01:43 (27 अप्रैल) तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 12:34 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 14:51 (27 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- भरणी 19:00 तक, फिर कृत्तिका 21:48 (27 अप्रैल) तक
- योग
- आयुष्मान 21:58 तक, फिर सौभाग्य 22:44 (27 अप्रैल) तक
- करण
- बव 12:34 तक, फिर बालव 01:44 (27 अप्रैल) तक, फिर कौलव 14:51 (27 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
- राहु काल10:57 – 12:32
- यमगंड15:43 – 17:19
- गुलिक काल07:46 – 09:21
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:10 – 07:46
- लाभ(शुभ)07:46 – 09:21
- अमृत(शुभ)09:21 – 10:57
- काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:32
- शुभ(शुभ)12:32 – 14:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:19
- चर(सामान्य)17:19 – 18:54
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:54 – 20:19
- काल(वर्जित (परंपरा))20:19 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:32 (27 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)00:32 (27 अप्रैल) – 01:56 (27 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)01:56 (27 अप्रैल) – 03:21 (27 अप्रैल)
- चर(सामान्य)03:21 (27 अप्रैल) – 04:45 (27 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:45 (27 अप्रैल) – 06:09 (27 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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