पंचांग 15 जून 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जून 2047 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय00:44 (16 जून)
चंद्रास्त12:32
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कुंभ 13:55 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:10 (16 जून) तक, फिर कृष्ण नवमी 04:17 (17 जून) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 20:31 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 23:11 (16 जून) तक
योग
प्रीति 08:25 तक, फिर आयुष्मान 08:56 (16 जून) तक
करण
बालव 13:15 तक, फिर कौलव 02:10 (16 जून) तक, फिर तैतिल 15:11 (16 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
  • राहु काल09:16 – 10:55
  • यमगंड14:14 – 15:53
  • गुलिक काल05:58 – 07:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))05:58 – 07:37
  • शुभ(शुभ)07:37 – 09:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:16 – 10:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:35
  • चर(सामान्य)12:35 – 14:14
  • लाभ(शुभ)14:14 – 15:53
  • अमृत(शुभ)15:53 – 17:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:32 – 19:12

रात

  • लाभ(शुभ)19:12 – 20:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:53
  • शुभ(शुभ)21:53 – 23:14
  • अमृत(शुभ)23:14 – 00:35 (16 जून)
  • चर(सामान्य)00:35 (16 जून) – 01:55 (16 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:55 (16 जून) – 03:16 (16 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:16 (16 जून) – 04:37 (16 जून)
  • लाभ(शुभ)04:37 (16 जून) – 05:58 (16 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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