पंचांग 22 जून 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 जून 2047 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय05:39 (23 जून)
चंद्रास्त18:27
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ 01:47 (23 जून) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 14:54 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:05 (23 जून) तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:48 तक, फिर मृगशीर्ष 14:40 (23 जून) तक
योग
शूल 13:26 तक, फिर गण्ड 13:27 (23 जून) तक
करण
शकुनि 14:54 तक, फिर चतुष्पद 03:33 (23 जून) तक, फिर नाग 16:05 (23 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल09:17 – 10:57
  • यमगंड14:15 – 15:55
  • गुलिक काल05:59 – 07:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))05:59 – 07:38
  • शुभ(शुभ)07:38 – 09:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:17 – 10:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:36
  • चर(सामान्य)12:36 – 14:15
  • लाभ(शुभ)14:15 – 15:55
  • अमृत(शुभ)15:55 – 17:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:13

रात

  • लाभ(शुभ)19:13 – 20:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:34 – 21:55
  • शुभ(शुभ)21:55 – 23:16
  • अमृत(शुभ)23:16 – 00:36 (23 जून)
  • चर(सामान्य)00:36 (23 जून) – 01:57 (23 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:57 (23 जून) – 03:18 (23 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:18 (23 जून) – 04:38 (23 जून)
  • लाभ(शुभ)04:38 (23 जून) – 05:59 (23 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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