पंचांग 11 सितंबर 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 सितंबर 2047 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय23:12
चंद्रास्त11:59
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 03:43 (12 सित॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 05:45 (13 सित॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 10:25 तक, फिर रोहिणी 13:15 (12 सित॰) तक
योग
हर्षण 15:37 तक, फिर वज्र 16:23 (12 सित॰) तक
करण
विष्टि 14:33 तक, फिर बव 03:43 (12 सित॰) तक, फिर बालव 16:48 (12 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:03
  • यमगंड07:54 – 09:26
  • गुलिक काल10:58 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:21 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:03 – 15:35
  • चर(सामान्य)15:35 – 17:08
  • लाभ(शुभ)17:08 – 18:40

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:40 – 20:08
  • शुभ(शुभ)20:08 – 21:35
  • अमृत(शुभ)21:35 – 23:03
  • चर(सामान्य)23:03 – 00:31 (12 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (12 सित॰) – 01:58 (12 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (12 सित॰) – 03:26 (12 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:26 (12 सित॰) – 04:54 (12 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (12 सित॰) – 06:21 (12 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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