पंचांग 30 सितंबर 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 सितंबर 2047 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:24
चंद्रोदय16:01
चंद्रास्त04:00 (1 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मकर 12:10 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 01:31 (1 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 02:23 (2 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 00:46 (1 अक्टू॰) तक, फिर शतभिषा 02:13 (2 अक्टू॰) तक
योग
धृति 19:26 तक, फिर शूल 18:58 (1 अक्टू॰) तक
करण
बव 13:14 तक, फिर बालव 01:31 (1 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 13:54 (1 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल07:54 – 09:24
  • यमगंड10:54 – 12:24
  • गुलिक काल13:54 – 15:24

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:24 – 07:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 10:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:54
  • चर(सामान्य)13:54 – 15:24
  • लाभ(शुभ)15:24 – 16:54
  • अमृत(शुभ)16:54 – 18:24

रात

  • चर(सामान्य)18:24 – 19:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:54 – 21:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:24 – 22:54
  • लाभ(शुभ)22:54 – 00:24 (1 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:24 (1 अक्टू॰) – 01:54 (1 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:54 (1 अक्टू॰) – 03:24 (1 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:24 (1 अक्टू॰) – 04:54 (1 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (1 अक्टू॰) – 06:25 (1 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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