पंचांग 6 अक्टूबर 2047
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 अक्टूबर 2047 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय19:39
चंद्रास्त08:09
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 09:21 तक, फिर कृष्ण तृतीया 11:49 (7 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 11:25 तक, फिर भरणी 14:24 (7 अक्टू॰) तक
- योग
- हर्षण 20:39 तक, फिर वज्र 21:36 (7 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 09:21 तक, फिर वणिज 22:34 तक, फिर विष्टि 11:49 (7 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
- राहु काल16:50 – 18:19
- यमगंड12:22 – 13:51
- गुलिक काल15:20 – 16:50
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
- चर(सामान्य)07:55 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:53
- अमृत(शुभ)10:53 – 12:22
- काल(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:51
- शुभ(शुभ)13:51 – 15:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:20 – 16:50
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:50 – 18:19
रात
- शुभ(शुभ)18:19 – 19:50
- अमृत(शुभ)19:50 – 21:20
- चर(सामान्य)21:20 – 22:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:51 – 00:22 (7 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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