पंचांग 18 अक्टूबर 2047
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 अक्टूबर 2047 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय06:26 (19 अक्टू॰)
चंद्रास्त17:21
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 12:36 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 08:57 (19 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 20:36 तक, फिर चित्रा 17:39 (19 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 09:42 तक, फिर वैधृति 05:33 (19 अक्टू॰) तक, फिर विष्कम्भ 01:17 (20 अक्टू॰) तक
- करण
- शकुनि 12:36 तक, फिर चतुष्पद 22:49 तक, फिर नाग 08:57 (19 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:42
- राहु काल10:52 – 12:19
- यमगंड15:14 – 16:42
- गुलिक काल07:56 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:29 – 07:56
- लाभ(शुभ)07:56 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
- काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:19
- शुभ(शुभ)12:19 – 13:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:42
- चर(सामान्य)16:42 – 18:10
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:10 – 19:42
- काल(वर्जित (परंपरा))19:42 – 21:14
- लाभ(शुभ)21:14 – 22:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:19 (19 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:19 (19 अक्टू॰) – 01:52 (19 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (19 अक्टू॰) – 03:24 (19 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (19 अक्टू॰) – 04:57 (19 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:57 (19 अक्टू॰) – 06:29 (19 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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