पंचांग 27 अक्टूबर 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 अक्टूबर 2047 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय14:02
चंद्रास्त01:57 (28 अक्टू॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
मकर 17:42 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 12:34 तक, फिर शुक्ल दशमी 13:13 (28 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 06:19 (28 अक्टू॰) तक, फिर शतभिषा 07:55 (29 अक्टू॰) तक
योग
गण्ड 00:28 (28 अक्टू॰) तक, फिर वृद्धि 00:04 (29 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 12:34 तक, फिर तैतिल 00:49 (28 अक्टू॰) तक, फिर गर 13:13 (28 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल16:37 – 18:04
  • यमगंड12:18 – 13:44
  • गुलिक काल15:11 – 16:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:32 – 07:58
  • चर(सामान्य)07:58 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:51
  • अमृत(शुभ)10:51 – 12:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • शुभ(शुभ)13:44 – 15:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 18:04

रात

  • शुभ(शुभ)18:04 – 19:37
  • अमृत(शुभ)19:37 – 21:11
  • चर(सामान्य)21:11 – 22:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:18 (28 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (28 अक्टू॰) – 01:52 (28 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:52 (28 अक्टू॰) – 03:25 (28 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (28 अक्टू॰) – 04:59 (28 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:59 (28 अक्टू॰) – 06:32 (28 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें