पंचांग 14 नवंबर 2047

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 नवंबर 2047 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:40
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय04:03 (15 नव॰)
चंद्रास्त15:09
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 08:26 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 05:29 (15 नव॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 02:03 (16 नव॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 09:54 तक, फिर हस्त 07:38 (15 नव॰) तक
योग
विष्कम्भ 19:21 तक, फिर प्रीति 15:31 (15 नव॰) तक
करण
बालव 08:26 तक, फिर कौलव 19:02 तक, फिर तैतिल 05:29 (15 नव॰) तक, फिर गर 15:49 (15 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
  • राहु काल13:43 – 15:08
  • यमगंड06:40 – 08:04
  • गुलिक काल09:29 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:40 – 08:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:04 – 09:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:29 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:18
  • लाभ(शुभ)12:18 – 13:43
  • अमृत(शुभ)13:43 – 15:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
  • शुभ(शुभ)16:32 – 17:57

रात

  • अमृत(शुभ)17:57 – 19:32
  • चर(सामान्य)19:32 – 21:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:19 (15 नव॰)
  • लाभ(शुभ)00:19 (15 नव॰) – 01:54 (15 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (15 नव॰) – 03:29 (15 नव॰)
  • शुभ(शुभ)03:29 (15 नव॰) – 05:05 (15 नव॰)
  • अमृत(शुभ)05:05 (15 नव॰) – 06:40 (15 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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